Friday, 5 April 2013

'कौन' हूँ मैं ...




अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,

खो दो तो एक कहानी हूँ मैं ...

रोक पाए ना जिसको ये सारी दुनिया,

वो बंद अंखियों का पानी हूँ मैं ...

सब को प्यार देने की आदत है मुझे,

अपनी एक अलग पहचान बनाने की एक जिद्द है मुझे … 

कितना ही गहरा ज़ख्म दे जाये कोई,

उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है मुझे … 

इस अजनबी सी दुनिया में, एक अकेला सा ख्वाब हूँ मैं,

सवालों से खफा-खफा, कोई छोटा सा जवाब हूँ मैं … 

जो समझ ही ना पाए, उनके लिए 'कौन' हूँ मैं, 

और जो समझ जाये, उसके लिए खुली किताब हूँ मैं ...

आँखों से देखोगे तो हमेशा ही खुश पाओगे मुझे,

जब पूछोगे दिल से, तो दर्द का एक सैलाब हूँ मैं ...

अगर रख सको संभाल कर, तो एक अनमोल निशानी हूँ मैं,

खो दो अगर यूँ ही, तो एक अनसुनी कहानी हूँ मैं ...

7 comments:

  1. saarey jazbaat daal diey ismey..Megha....

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  2. Thanks a lot Hitesh :) poetry is all abt expressing yourself

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